देश का युवा स्वर -----------
मन में जब उबाल उठे
चित्त कहीं शांत न बैठे
उठा कलम और सींच डाल
उन क्यारियों में उम्मीद की धार
जिससे पट जाये सपनों की हर फसल
और शेष रह जाये बस संतुष्टि और तृप्ति
जिसे काट तुम भविष्य का चूल्हा जोड़ना
और पकाना समाजवाद की रोटी ते
विकास की साग ----------