Thursday, April 24, 2014

देश का युवा स्वर -----------

मन में जब उबाल उठे
चित्त कहीं शांत न बैठे 
उठा कलम और सींच डाल
उन क्यारियों में उम्मीद की धार
जिससे पट जाये सपनों की हर फसल 
और शेष रह जाये बस संतुष्टि और तृप्ति
जिसे काट तुम भविष्य का चूल्हा जोड़ना 
और पकाना समाजवाद की रोटी ते
विकास की साग ---------- 
वर्षों की मुरझाई राजनीति ने
सोने का कमल खिलाया है
बीज , प्यार विश्वास का बोने
देश का बच्चा आया है
जात पात के बोझ को फेंकता
धर्मों के मतभेदों को उड़ेलता
गरीबी ,भ्रष्टाचार की बेड़ियोंको
नया सिपाही आया है
सोने का कमल खिलाया है
गंगा और साबरमती के संगम पर
आज बनारस हर्षाया है
सबने गले लगाया  है
वर्षों की मुरझाई राजनीति ने
सोने का कमल खिलाया है --------

बनारस के भाग्योदय पर विशेष ----