Wednesday, September 16, 2015

मैं चलूँगा ,अभी और चलूँगा!
देखना है मुझे कि क्षितिज के पार क्या है ?
मेरा मुक्कम्मल जहाँ क्या है ?
मैं चलूँगा देखने कि कैसे
वक़्त के तराजू पे उम्र का पलड़ा झुकने लगता है
कुछ दूर जूतों में चलकर खाली पैर  बैठने लगता है
चेहरे की झुर्रियां बढ़ने लगती हैं
एक बच्चा उसमें कई कहानियां गढ़ने लगता है
               मैं चलूँगा …अभी  और चलूँगा
कि देखना है मुझे उत्तरी गोलार्ध का सतरंगी आसमान
जिसे औरोरा बोरियलिस कहते हैं
छूना है कुछ बर्फ के मचान
जिसे इग्लू कहते हैं
वहीँ से बनवा लाऊंगा  सील के छाल से बने दो जोड़े मोज़े
एक अपने लिए और एक तुम्हारे लिए
फिर घूमने चलेंगे सर्दियों में एलिफिस्टन पार्क।
                मैं चलूँगा। …अभी और चलूँगा। ....

Monday, September 14, 2015

बिस्तर से उठने से लेकर वापस बिस्तर पर गिरने तक
हाथ में कलम से लेकर जहाज पे लदे मिसाइल तक
कीबोर्ड पर फिसलती उँगलियों से लेकर मोबाइल के टच स्क्रीन तक
ज़मीन के अंदर दौड़ती मेट्रो से लेकर मंगल पर टहलता लैंड रोवर तक
समंदर को बांधती दीवारों से लेकर नदियों को जोड़ते पुलों तक
आँख में लगे लेंस से लेकर दिल में लगे पेसमेकर तक
हर धड़कन,हर साँस ,जो चल रही है ,कर्ज़दार है !
happy engineer's day

Thursday, September 3, 2015

तुर्किश तट पर किनारे लगा aylan
अौंधे मुंह गिरा पड़ा है 
वो दूर जा रहा था 
कत्ले-आम से ,बारूद गोलों से
उसको बंदूकों से खेलना गंवारा न था 
पर उसका दूर जाना उनको गंवारा न था
डूब गयी इंसानियत डूब गया अमन
डूब गया aylan
कुछ पाने से पहले कुछ खोने से पहले !

Thursday, July 30, 2015

3-4 दिनों से पश्चिमी दबाव् के कारण हुई बारिश ने शहर में अँधेरा कर रखा था
अँधेरा जैसा ९३ के ब्लास्ट ने मुंबई के आसमान में कर दिया था
पर आज सुबह से खिली धुप निकली है
कोनों में दबी कई दिनों की नमी अब सुख रही है
आज तड़के उसको फांसी दी गयी है। 

Monday, July 27, 2015

एक रौशनी रामेश्वरम के झोपड़े से निकली
बड़ी हुई और अग्निपंख लगाकर उड़ चली
मिसाइल बनी   मिसाल बनी
और बड़ी हुई तो सब के मन के अंदर जलने लगी
करोड़ों दीयों से भरा देश अचानक से जैसे अँधेरे में है आज!
हमारे सपनों के मकान से वो रौशनी चली गयी !


Wednesday, February 11, 2015


SPECIAL ON JHAROOMAR PARTY WIN:
राजनीतिक '' घटना '' बन कर उभरे हैं केजरीवाल
जैसे प्रथम विश्व युद्ध के बाद हिटलर उभरा था
अपनी कम्पास की नोंक दिल्ली पर रख इसने खींच दी है
मनचाहे माप की त्रिज्या वाली एक वृत्त
और परिधि पे बिठा दिए हैं अपने ही जैसे कई केजरीवाल
आज भले ही देखने में बीजेपी की सबसेट वाली वृत्त मालूम पड़ती हो
पर जल्द ही सुपरसेट बनेगी
जब परिधि पर बैठे केजरीवाल खींचेंगे मनचाहे त्रिज्या वाले और कई वृत्त \
जिसमें समां जायेगा पूरा भारत का राजनीतिक मानचित्र
चाणक्यों के दिन लद जायेंगे
पप्पू राजा भी चप्पू चलाएंगे
दीदी,अम्मा,बड़ी अम्मा और हम  सब मिलकर  देखेंगे
जो आप (AAP) दिखाएंगे।
वो भी एक घटना होगी। आज भी  एक घटना हुई है।