एक रौशनी रामेश्वरम के झोपड़े से निकली
बड़ी हुई और अग्निपंख लगाकर उड़ चली
मिसाइल बनी मिसाल बनी
और बड़ी हुई तो सब के मन के अंदर जलने लगी
करोड़ों दीयों से भरा देश अचानक से जैसे अँधेरे में है आज!
हमारे सपनों के मकान से वो रौशनी चली गयी !
बड़ी हुई और अग्निपंख लगाकर उड़ चली
मिसाइल बनी मिसाल बनी
और बड़ी हुई तो सब के मन के अंदर जलने लगी
करोड़ों दीयों से भरा देश अचानक से जैसे अँधेरे में है आज!
हमारे सपनों के मकान से वो रौशनी चली गयी !
No comments:
Post a Comment