Saturday, July 27, 2019

चलो ! अगले इतवार पीछे लॉन में भीगते हैं |
बोस  के स्पीकर पर यानी को सुनते हैं
पकोड़े तुम बना लेना प्याज मैं काट देता हूँ
ख़ुशी तुम रख लेना आंसू मैं साथ रखता हूँ
चलो ! इस बार लॉन के फाउंटेन में कुछ मछली ही पाल लेते हैं |
चलो ! अगले इतवार पिछोला लेक चलते हैं |
गाड़ी  थोड़ा तुम चला लेना थोड़ा हम चला लेते हैं |
कहीं हाईवे के किनारे बोनट पर बैठकर
गर्म कॉफ़ी पीते हैं |
चलो ! इस बार बारिश की बूंदो को जीते

बहुत देर बारिश हुई है |
दिवाकर जी के घर पर सरोद के तारों की नारियल तेल से चम्पी रही है
प्रमोद भी तबले की टूटी हुई स्याही पर नया लेप चढ़ा  रहा है
कालीन झाड़ी जा रही हैं |  मुन्ना जी को भी चाय नाश्ते का बोल दिया है
लगता है आज राग देश से ही शुरुआत होगी
कल इस साल की पहली बारिश हुई है
बहुत देर बारिश हुई है |

कल बहुत बारिश हुई है 

कल इस साल की पहली बारिश हुई है
बहुत देर बारिश हुई है
मंगू सुबह से हल निकालकर  बैलों को तैयार कर रहा है
अमीना ने भी चूल्हा ज़ोड़  नाश्ते का पोटला तैयार कर दिया है
बैलों को हरे चने चबेने मिल गए है
लगता है पश्चिम बांध वाले खेत में खूब पानी लगा है
शुभलाल! चौकी लेकर जल्दी खेत पर आ जाना
आज ही खेत को समतल कर तैयार कर देंगे |
                 कल इस साल की पहली बारिश हुई है
                  बहुत देर बारिश हुई है |
सोनू की मम्मी ने भी बक्से से छाते और रेनकोट निकाल लिया है
बरसाती जूतों के साथ बस्तों पर भी कवर लग रहे हैं
ऑटो वाला लगता है ! कदंबकुआं वाले रोड में फंस गया है
स्कूल को लेट हो जायेगा
अरे संजय ! प्याज के पकोड़े बने हैं | रख लो
लोकल में भी आज काफी भीड़ होगी
ट्रेनें लेट चल रही हैं |
कल इस साल की पहली बारिश हुई है 

Wednesday, September 16, 2015

मैं चलूँगा ,अभी और चलूँगा!
देखना है मुझे कि क्षितिज के पार क्या है ?
मेरा मुक्कम्मल जहाँ क्या है ?
मैं चलूँगा देखने कि कैसे
वक़्त के तराजू पे उम्र का पलड़ा झुकने लगता है
कुछ दूर जूतों में चलकर खाली पैर  बैठने लगता है
चेहरे की झुर्रियां बढ़ने लगती हैं
एक बच्चा उसमें कई कहानियां गढ़ने लगता है
               मैं चलूँगा …अभी  और चलूँगा
कि देखना है मुझे उत्तरी गोलार्ध का सतरंगी आसमान
जिसे औरोरा बोरियलिस कहते हैं
छूना है कुछ बर्फ के मचान
जिसे इग्लू कहते हैं
वहीँ से बनवा लाऊंगा  सील के छाल से बने दो जोड़े मोज़े
एक अपने लिए और एक तुम्हारे लिए
फिर घूमने चलेंगे सर्दियों में एलिफिस्टन पार्क।
                मैं चलूँगा। …अभी और चलूँगा। ....

Monday, September 14, 2015

बिस्तर से उठने से लेकर वापस बिस्तर पर गिरने तक
हाथ में कलम से लेकर जहाज पे लदे मिसाइल तक
कीबोर्ड पर फिसलती उँगलियों से लेकर मोबाइल के टच स्क्रीन तक
ज़मीन के अंदर दौड़ती मेट्रो से लेकर मंगल पर टहलता लैंड रोवर तक
समंदर को बांधती दीवारों से लेकर नदियों को जोड़ते पुलों तक
आँख में लगे लेंस से लेकर दिल में लगे पेसमेकर तक
हर धड़कन,हर साँस ,जो चल रही है ,कर्ज़दार है !
happy engineer's day

Thursday, September 3, 2015

तुर्किश तट पर किनारे लगा aylan
अौंधे मुंह गिरा पड़ा है 
वो दूर जा रहा था 
कत्ले-आम से ,बारूद गोलों से
उसको बंदूकों से खेलना गंवारा न था 
पर उसका दूर जाना उनको गंवारा न था
डूब गयी इंसानियत डूब गया अमन
डूब गया aylan
कुछ पाने से पहले कुछ खोने से पहले !

Thursday, July 30, 2015

3-4 दिनों से पश्चिमी दबाव् के कारण हुई बारिश ने शहर में अँधेरा कर रखा था
अँधेरा जैसा ९३ के ब्लास्ट ने मुंबई के आसमान में कर दिया था
पर आज सुबह से खिली धुप निकली है
कोनों में दबी कई दिनों की नमी अब सुख रही है
आज तड़के उसको फांसी दी गयी है।