Monday, September 14, 2015

बिस्तर से उठने से लेकर वापस बिस्तर पर गिरने तक
हाथ में कलम से लेकर जहाज पे लदे मिसाइल तक
कीबोर्ड पर फिसलती उँगलियों से लेकर मोबाइल के टच स्क्रीन तक
ज़मीन के अंदर दौड़ती मेट्रो से लेकर मंगल पर टहलता लैंड रोवर तक
समंदर को बांधती दीवारों से लेकर नदियों को जोड़ते पुलों तक
आँख में लगे लेंस से लेकर दिल में लगे पेसमेकर तक
हर धड़कन,हर साँस ,जो चल रही है ,कर्ज़दार है !
happy engineer's day

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