कहते हैं प्यार में बड़ी पेचीदगी होती है
पर प्यार से प्यार करो तो जानो कि
इसमें तो कई अरसों की जिंदगी होती है
प्यार कभी मरता है, मारता है
भटकता है, मिलाता है
चमकता है जुगनुओं की तरह
अँधेरे वीरान कमरों में तो कभी
जलता है किसी तेज लौ सी
मंदिरों में, गिरिजाघरों में
प्यार कभी हँसता है
माँ के गोद में बैठे बच्चे की आँखों में
तो कभी रोता है उन भूखे नंगे
सड़कों के किनारे बैठे बिन माँ के बच्चों की राहों में
प्यार कभी बरसता है बसंत के
बहारों में , सावन के मल्हारों में
होली के हुह्दंगों में तो कभी
तरसता है प्यासे सूखे रेगिस्तानों में
पथरीली पहाड़ी नदियों की ढलानों में
वक़्त की डोर थामे प्यार
कभी बचपन में किलकारियों से गूंजता है
जवानी में जिम्मेदारियों से झुझता है
तो कभी बुढ़ापे में घर के किसी कोने में
बीती जिंदगी के पन्नों पर लगी सुखी स्याही
को खुरचता है
कहते हैं प्यार में बड़ी पेचीदगी होती है
पर प्यार से प्यार करो तो जानो कि
इसमें तो अरसों की जिन्दगी होती है.
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