shayari series--1.
सुनने सुनाने को नहीं रही हमारी बंदिशें
सुनने सुनाने को नहीं रही हमारी बंदिशें
कि लोग अब ग़ज़लों के दीवाने नहीं रहे
छोड़ भी दे तू साकी यूँ पिलाना
कि पीने पिलाने के अब बहाने नहीं रहे
घरों में छुप के बैठ गए हैं जिगरवाले
कि सड़कों पर उतरने के ज़माने नहीं रहे-------
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