Monday, April 15, 2013


INTROSPECTION SERIES  2.
सुबह से 'Chariots of fire' का  बैकग्राउंड स्कोर सुन रहा हूँ ---अब शाम होने को है फिर भी  सुनता ही जा रहा हूँ .सच मानिये संगीत निः शब्द रहते हुए भी न जाने कितने ही शब्भेदी बाण चलाता रहता है ---- मन के हर कोनो को जगाता रहता है .मुझे पता  है की जो संवेदनाएं मेरे अन्दर अभी जगी हैं कितनी भी कोशिश करूँ कागज़ पर नहीं उकेर सकता शायद इसीलिए संगीत विद्या को अन्य किसी भी विद्या से ऊपर का दर्जा प्राप्त है --अब चाहे इसे समझना ,सीखना कठिन हो या इसे शब्दों का रूप देना .
          संगीत एक संगम है जिसमें बहुत सरे छिटपुट,दबे और नए उपजे भावों को एक जुट कर प्रस्तुत किया जाता है .लेखनी वास्तव में ये करने में बहुत पीछे छुट जाती है .सही कहूँ तो आपको क्या लगता है गुलज़ार साहब के वो इज़ाज़त वाला गाना 'मेरा कुछ सामान --तुम्हारे पास पड़ा है ' कैसा  होता  अगर उन्हें स्वर बद्द्ध न किया जाता .शायद याद भी न रहते ---और अगर रहते भी तो आरे तिरछे और टूटे फूटे दृश्यों  के रूप  में .
          पूरे विश्व में संगीत की एक ही भाषा है .उन्हें समझने के लिए लेखनी की तरह भाषा रुपी बैसाखी की जरूरत नहीं पड़ती .भले ही लोग कितने भी बड़े अनुवादक हों पर एक जर्मन कवि की जर्मन में लिखी कविता की नैसर्गिकता और पवित्रता को हिंदी या किसी अन्य भाषा में पूर्णतया नहीं दिखा सकते .---पर यही संगीत बड़ी आसानी से कर जाती है .जाने कितने ही जुगलबंदियां इसके साक्ष्य हैं .YOU TUBE  खोलिए तो आपको दिख जायेगा की कैसे ERIC CLAYPTON  और ANOUSHKA SHANKAR राग यमन में बातें कर लेते हैं . B B SINGH और JIM VAUGHN अफ्रीकन ब्लूज पर एक साथ थिरक लेते हैं .
        संगीत शरीर में खून की तरह दौड़ता है तभी तो पूरा  विश्व SHAKEERA के साथ 'WAKA -वाका' पे झूमता है इसकी बिना परवाह किये हुए की शब्दों के अर्थ क्या हैं ---- बोल क्या हैं ?---- संगीत इन सब बंधनों से परे हमें उस STATE OF MIND  में पहुंचा देता है जहाँ से लौटने का मन नहीं करता ---

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