1.From the collection of my 'DREAM BOOK'----
हर छोर हमारे रिश्ते का
बुनता है हर दिन एक नया रेशा
बुनता है की कैसे
दो से हम चार होंगे
पेड़ में लदे आम से
मसाले दार अचार होंगे.
जायेंगे किसी वर्जिन आइलैंड पर
पैरों से पैरों को सटा फान्सेंगें मछलियाँ
ले आऊंगा मैं उन्हें हमारी ही रेशों में बांधकर
टांग दूंगा दो पत्थर जोड़ सुखी लकड़ियों वाली आंच पर
जब तक पकेंगी
रेत पर लेट आसमान की तरफ देखते हुए
निर्धारित करेंगे तारों के बीच हमारी जगह
वहीँ कहीं सप्तर्षि के ध्रुव तारे के पास
हाँ! मैं अकेले वहां नहीं चलूँगा
कुछ सफ़ेद रेशे मेरी बालों के और कुछ तुम्हारे
बनायेंगे एक लम्बी सी सीढ़ी ऊपर साथ जाने की
पर अभी नहीं ---अरे देखो !
कहीं आंच में मछलियों के साथ पक न जायें हमारे रेशे
हर छोर हमारे रिश्ते का
बुनता है हर दिन एक नया रेशा
बुनता है की कैसे?------
हर छोर हमारे रिश्ते का
बुनता है हर दिन एक नया रेशा
बुनता है की कैसे
दो से हम चार होंगे
पेड़ में लदे आम से
मसाले दार अचार होंगे.
जायेंगे किसी वर्जिन आइलैंड पर
पैरों से पैरों को सटा फान्सेंगें मछलियाँ
ले आऊंगा मैं उन्हें हमारी ही रेशों में बांधकर
टांग दूंगा दो पत्थर जोड़ सुखी लकड़ियों वाली आंच पर
जब तक पकेंगी
रेत पर लेट आसमान की तरफ देखते हुए
निर्धारित करेंगे तारों के बीच हमारी जगह
वहीँ कहीं सप्तर्षि के ध्रुव तारे के पास
हाँ! मैं अकेले वहां नहीं चलूँगा
कुछ सफ़ेद रेशे मेरी बालों के और कुछ तुम्हारे
बनायेंगे एक लम्बी सी सीढ़ी ऊपर साथ जाने की
पर अभी नहीं ---अरे देखो !
कहीं आंच में मछलियों के साथ पक न जायें हमारे रेशे
हर छोर हमारे रिश्ते का
बुनता है हर दिन एक नया रेशा
बुनता है की कैसे?------
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