बातें होती हैं होनी भी चाहिए
क्यूंकि न जाने क्यूँ इस भगा दौड़ी में
जीवन की आपाधापी में
अब बातें नहीं रहीं ,रिश्तों में गर्माहट नहीं रहीं
बातें पैदा होती हैं पानी के बुलबुले की तरह
बचपन में तुत्लाहतों ,बर्बराहतों से होती हुई सतह पर आती है
वक़्त के थपेड़ो से टकराती ,किसी को काटती कभी खुद ही कटती
किसी को पसंद न आने वाली कहानी की तरह बुढ़ापे में डूब जाती है
भगवन भक्त की रूहानी बातें
बाप बेटे की जीवन की राह दिखाती बातें
दोस्तों की शैतानी भरी बातें तो
कभी अनजानों के बीच की रत जगी बातें
तरह तरह की बातें ,पर बातों का क्या
बातें तो होती ही है होनी भी चाहिए
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