प्रारंभ है उत्थान का ,मुक्ति के प्रयाण का,जीर्ण शीर्ण पर्णहीन ,नीड चीर शूरवीर ,दानवीर और फ़कीर ,क्षितिज से व्योम तक अब बिगुल है उड़ान का -----प्रारंभ है उत्थान का .....
No comments:
Post a Comment