कल पीछे lawn में सो रही रात
सुबह तडके खिड़की से झांकते हुए बोल पड़ी---
क्यूँ तुम इस कदर अज कल सिलवटों से झगड़ते हो
यूँ रात भर बिस्तर पर पूरब पश्चिम करते हो
मैं कह पड़ा---
की शायद मेरा साथ अब बिस्तर को रास नहीं आता
मेरा दोस्त नींद भी अब मेरे पास नहीं आता
रात पूछ पड़ी ---
आखिर क्यूँ इतना खुद को सताते हो
दूर किसी को रात भर सपनों में आकर जागते हो
सुबह तडके खिड़की से झांकते हुए बोल पड़ी---
क्यूँ तुम इस कदर अज कल सिलवटों से झगड़ते हो
यूँ रात भर बिस्तर पर पूरब पश्चिम करते हो
मैं कह पड़ा---
की शायद मेरा साथ अब बिस्तर को रास नहीं आता
मेरा दोस्त नींद भी अब मेरे पास नहीं आता
रात पूछ पड़ी ---
आखिर क्यूँ इतना खुद को सताते हो
दूर किसी को रात भर सपनों में आकर जागते हो
कई दुसरे तरीके हैं प्यार जताने के
फूल ,ख़त या और कुछ नहीं तो बस उसका एक ज़िक्र
इन्हें क्यूँ नहीं अपनाते हो
मैंने कुछ रुक कर फिर से कहा ---
की जागने और जगाने का सुख तुझसे बेहतर कौन जान सकता है
जाने कितने ही युवाओं और युवतियों के सपने तुमसे शुरू होके
तुम्ही पे ख़त्म हो जाते हैं
अब बस यही गुजारिश है की कुछ दिन मुझे अपने साथ जागने दो
किसी के अनकही बातों में छिपे मायने समझने दो
रात ने फिर कहा ---
की मर्ज़ी तेरी है परिणाम भी तेरा ही होगा
बड़ी बाजी है और जिंदगी भी अब आधी है
मैंने कहा ---
पर धैर्य मेरा बड़ा जिद्दी है देखना है इसे की
वक़्त के हाथों में भी कितने पिद्दी हैं
फूल ,ख़त या और कुछ नहीं तो बस उसका एक ज़िक्र
इन्हें क्यूँ नहीं अपनाते हो
मैंने कुछ रुक कर फिर से कहा ---
की जागने और जगाने का सुख तुझसे बेहतर कौन जान सकता है
जाने कितने ही युवाओं और युवतियों के सपने तुमसे शुरू होके
तुम्ही पे ख़त्म हो जाते हैं
अब बस यही गुजारिश है की कुछ दिन मुझे अपने साथ जागने दो
किसी के अनकही बातों में छिपे मायने समझने दो
रात ने फिर कहा ---
की मर्ज़ी तेरी है परिणाम भी तेरा ही होगा
बड़ी बाजी है और जिंदगी भी अब आधी है
मैंने कहा ---
पर धैर्य मेरा बड़ा जिद्दी है देखना है इसे की
वक़्त के हाथों में भी कितने पिद्दी हैं
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